Kishore Rafi Male Duets

Some popular male duets and chorus songs sung by Kishore Kumar, Mohammed Rafi, Mukesh, Manna Dey, Mahendra Kapoor, RD Burman, Amit Kumar, Shailendra, Anwar, Nitin Mukesh and Kamlesh Avasthi.

(Alert: Links stopped working with time, so only the list remains now as a reminder of my collection here… updated on 22/08/2017)

  • Aaj Faisla Ho Jayega
  • Aati Rahengi Baharein
  • Aji Thahero Zara Dekho
  • Amar Akbar Anthony
  • Aye Yaar Sun Yaari Teri
  • Aye Yaar Teri Yaari
  • Babu Samjho Ishare
  • Bachhe Mein Hai Bhagwan
  • Bachke Rehna Re Baba
  • Bade Bade Logon Ke Yaar
  • Bane Chahe Dushman
  • Chal Mere Bhai
  • Chana Zor Garam
  • Dil Ne Phir Yaad Kiya
  • Do Jasoos Karein Mahesoos
  • Do Bichare Bina Sahare
  • Dukki Pe Dukki Ho
  • Ek Chatur Naar
  • Ek Rasta Do Rahi
  • Hathon Ki Chand Lakeeron
  • Hoke Majboor Mujhe
  • Hum Bhi Hain Tum Bhi Ho
  • Humko Tumse Ho Gaya Hai
  • Hum Premee Prem Karna
  • Hum To Jhuk Kar Salam Karte Hain
  • Ja Jaldi Bhag Ja
  • Jaanu Meri Jaan
  • Kitni Khoobsoorat Yeh
  • Khuda Hi Juda
  • Lambuji Lambuji
  • Mere Dildar Ka Bankpan
  • Mera Rang De Basanti Chola
  • Mile Jo Kadi Kadi
  • Mohabbat Bade Kaam Ki
  • Parda Hai Parda Hai (YouTube)
  • Pyar Humein Kis Mod Pe
  • Qurbani Qurbani Qurbani
  • Ramaiya Vasta Vaiya
  • Rang Jamake Jayenge (YouTube)
  • Sa Re Ga Ma…Ma Ga Re Sa
  • Saat Ajube Is Duniya Mein
  • Sarfaroshi Ki Tamanna Ab
  • Teen Batti Wala Govinda Aala (YouTube)
  • Tera Jalwa Tauba Hai
  • Teri Rab Ne Bana Di Jodi
  • Waqt Ki Hera Pheri Hai
  • Yaadon Ki Baraat
  • Yamma Yamma
  • Yeh Dosti Hum Nahin
  • Zindagi Imtihaan Leti Hai

5 thoughts on “Kishore Rafi Male Duets”

  1. I may add another outstanding chorus song of the film “Haqiqat”, “Hoke majboor mujhe usne bulaya hoga” sung by Mohd. Rafi, Manna Dey, Talat mahmood and Bhupendra Sing.

  2. व्यक्ति-पूजा के शिकार अमिताभ बच्चन

    मुझे लगता है, हर व्यक्ति को अपना मूल्यांकन स्वयं करना चाहिए। अपने गिरेबान में झांककर देखने की हिम्मत भी उसे स्वयं ही करनी चाहिए। परंतु हम दोनों में से कुछ भी स्वयं नहीं कर पाते। या फिर जब कभी करते हैं, तो स्वयं में सिर्फ आत्म-प्रदर्शन और आत्म-सुख ही खोजते हैं। खुद के कद को खुद ही छोटा करते हुए दूसरों को बड़ा मान-बताकर उनकी पूजा में सलंग्न हो जाते हैं। यह पूजा दरअसल व्यक्ति-पूजा कहलाती है। किसी की इज्जत करना अपनी जगह है, लेकिन व्यक्ति-पूजा खुद के झुकने की निशानी है।

    हमारे साथ यही सबसे बड़ी दिक्कत है कि हम अपने आप से कहीं ज्यादा ‘थोपी गईं आस्थाओं’ में यकीन करने लगते हैं। अपनी सुविधानुसार हम अपनी आस्थाएं खुद ही बनाते और खोजते हैं। मतलब कभी जानवारों में आस्थाएं खोजने लग जाते हैं, कभी किन्हीं पुरानी मुर्तियों में, तो कभी अपने से ही दिखने वाले व्यक्तियों में। हमारी आस्थाओं और व्यक्तिपूजा का कहीं कोई मानक नहीं है, जब जहां जिसे चाहा भगवान बना दिया और अपने सुख उसमें तलाशने लगे। यह हमारी असफल कोशिश होती है।

    दरअसल, मेरा इशारा उस व्यक्ति की तरफ है, जो महज एक कलाकार है, मगर हमने अपनी अंध-आस्थाओं और व्यक्ति-पूजा की परंपरा को निभाते हुए उसे आज ‘भगवान’ बना दिया है। गजब तो यह है कि उस कलाकार ने खुद को भगवान बनाए जाने या अपनी व्यक्ति-पूजा का कभी भी खुलकर या दबी जुबां में विरोध नहीं किया।

    दरअसल, मैं बात कर रही हूं कलाकार अमिताभ बच्चन की। अमिताभ बच्चन को मैं सिर्फ कलाकार ही नहीं, बल्कि एक बेहतरीन कलाकार मानती हूं। उन्हें या उनकी फिल्मों को जब भी मैंने देखा, उनके अभिनय को बेहद सहजता से लिया और कलाकार अमिताभ बच्चन की जहां जरूरत समझी तारिफ भी की। कलाकार के अतिरिक्त मेरी निगाह में अमिताभ बच्चन की कोई इमेज नहीं बनती, न ही कभी बनाने की कोशिश की। मैं कलाकार अमिताभ बच्चन को बेहतर जानती हूं वनिस्पत सदी का महानायक या बिग बी के।

    अक्सर जब मैं उन लोगों को देखती हूं, जिनकी निगाह में अमिताभ बच्चन कलाकार अमिताभ बच्चन नहीं सदी का महानायक ज्यादा हैं, तो उनकी सोच पर तरस आता है। सदी का महानायक जैसे उपनाम के आगे मुझे कलाकार अमिताभ बच्चन कहीं खोता हुआ दिखाई पड़ता है। दरअसल, अमिताभ बच्चन को सदी का महानायक घोषित करने और भगवान बनाने वाले वे लोग हैं, जो खुद कलाकार नाम की परिभाषा से अनजान हैं और अपनी बेवकूफियों पर बल्लियों उछला करते हैं।

    सवाल उठता है कि क्या अभिनय और कलाकार का आदि और अंत अमिताभ बच्चन ही हैं? क्या अमिताभ बच्चन के समकालीन कलाकारों की कोई हैसियत या इज्जत नहीं? आखिर अमिताभ बच्चन का हंसना, रोना, गाना, बीमार पड़ना या ब्लॉग लिखना ही क्यों हर किसी की चिंता और आकर्षण का कारण बना रहता है? मेरे लिए जितना अमिताभ बच्चन का अभिनय महत्वपूर्ण है, उतना ही राजेश खन्ना, विनोद मेहरा, शशि कपूर, संजीव आदि का अभिनय भी। क्या ये कलाकार कलाकार नहीं थे? ऐसा भी नहीं है कि इन सभी का कद अमिताभ बच्चन के कद से छोटा हो। बस, फर्क इतना है कि अमिताभ बच्चन ने बाजार और राजनीति का हाथ थाम लिया और ये कलाकार वह यह सब नहीं कर पाए। अमिताभ बच्चन ने व्यक्ति-पूजा को अपनी प्रसिद्धि का माध्यम बनाया लेकिन और कलाकार ऐसा नहीं कर सके। पर, यह तय है कि अभिनय के क्षेत्र में किसी का भी कद एक-दूसरे से कमतर नहीं है।

    कैसी विडंबना है कि अमिताभ बच्चन का बीमार होना मीडिया से लेकर जन की चिंता का सबसे बड़ा कारण बन जाता है, लेकिन अभी पिछले ही दिनों मशहूर गायक महेंद्र कपूर का जाना न मीडिया की बड़ी ख़बर बन सका न ही जन के दुख का सबब। इस अपेक्षा में न दोष अमिताभ बच्चन का है, न महेंद्र कपूर का, दरअसल दोष हमारा ही है कि हम कलाकार को उसके कद से नापते हैं, व्यवहार या अभिनय से नहीं।

    आजकल अमिताभ बच्चन का ब्लॉग-लेखन जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है। शायद अमिताभ बच्चन कोई अनोखा काम कर रहे हैं। हर अख़बार, हर पत्रिका उनका ब्लॉग छापने को बेताब है। इधर हिंदी में जबसे उन्होंने ब्लॉग लिखना शुरू किया है, मानो हमारे बीच कुछ अजूबा-सा ही घट गया है। अमिताभ बच्चन हिंदी फिल्मों में काम करते हैं और अगर वे अपना ब्लॉग हिंदी में लिख रहे हैं, तो इसमें इतना हैरानी की क्या बात है? दरअसल, उन्हें शुरूआत ही अपने ब्लॉग-लेखन की हिंदी से करनी चाहिए थी।

    बहरहाल, हम ऐसा करेंगे तो नहीं, लेकिन अगर करते हैं, तो मुझे खुशी ही होगी कि हम अमिताभ बच्चन को सिर्फ कलाकार की निगाह से ही देखें, किसी ‘सदी का महानायक’ जैसे सामंती उपनामों से नहीं।

  3. May I add three more songs : Bachhe mein hai bhagwan(NANHA FARISHTA),
    Mera rang de basanti chola( SHAHEED )
    Sarfaroshi ki tamanna ab ( SHAHEED )

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