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  • admin posted an update 4 months, 1 week ago

    Going to post things about my experiments with herbs and eatables in this thread, which I’d been doing in a similar thread of messages on Twitter till recently.

    • ये दूध की चाय थी या दूध वाला काढ़ा?

      अमूल के टेट्रापैक वाला दूध, थोड़ा अमूल का ही दूध पाउडर, गुड़, हल्दी, अदरक, तुलसी, काली मिर्च… लेकिन उबलने के साथ ही दूध फट गया (पाउडर को दूध तथा पानी के मिश्रण में मिलाने की ज़हमत नहीं उठाई थी शायद इसलिए), फ़िर भी उसमें थोड़ी चाय मिक्स करते हुए एक संतरा भी डाल दिया. लेकिन बात बनती दिखाई नहीं पड़ी तो थोड़ा सेंधा नमक व जामुन का सिरका भी डाल दिए, और अब यह मिश्रण जिह्वा को पसंद आने लगा, ख़ासकर पतीली के गर्भ में इकट्ठा हुए फल व जड़ी-बूटियों के साथ फटे दूध/ दूध के पाउडर वाला मिश्रण.

      दो बातें और : खटाश व गंध के मामले में नींबू का ऐसे नुस्ख़ों में इस्तेमाल बेहतर रहता है, लेकिन उसे काटने व निचोड़ने कि मेहनत से बचने के लिए मैं सिरके का इस्तेमाल कर बैठता हूँ. तो जो ऐसे नुस्ख़ों में पड़ना चाहें उन्हें मैं सावधानी के लिए पहले से ही बता दूँ, कि जामुन के सिरके के साथ-साथ कई अन्य जड़ी-बूटियाँ रक्त में शर्करा व ब्लड प्रेशर के इलाज़ रूप में/ कम करने के लिए जानी जाती रही हैं; इसे मैंने एक स्वस्थ व्यक्ति के रूप में भी कभी-कभार पैदा होने वाली सुस्ती से महसूस किया है. तो ऐसे नुस्ख़ों का मनमानी उपयोग करना भी सलाह योग्य नहीं माना जा सकता किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य में.

      दूसरा, कि चाय की पत्तियों को शेष मिश्रण से अलग रखने के लिए मैं उसे छननी में ही रखते हुए उबलते मिश्रण के ऊपर से मिलाने का प्रयोग करने लगा हूँ… तो इससे बेहतर क्या कोई और तरीक़ा हो सकता है? अगर चाय को किसी कपड़े की पोटली में रखकर उबालना हो, तो उस कपड़े के अंशों को अंतिम मिश्रण में शामिल होने से बचाने के लिए कपड़े का प्रकार कैसा चुनना होगा?

    • चुकंदर वाली चाय कभी पी है किसी ने? मैंने एक दिन बनाई थी तो उसका रंग कुछ ज़्यादा ही रंगीला हो गया था, लेकिन टेस्ट में कोई बहुत बड़ी तब्दीली दिखाई नहीं पड़ी थी मुझे. फ़िर भी चाय इंटरेस्टिंग बनी थी इसमें कोई दो राय नहीं है.

    • एक वुड ऐपल (कैथा), चार संतरे, हल्दी, काली मिर्च, तुलसी, अदरक, हींग, सेंधा नमक, लीक व ग़रम मसाला… लेकिन जब बात बनती दिखाई नहीं पड़ी तो दूध का पाउडर और डिल लीव्स भी डाल डाल दिए थे इस अज़ीबों-ग़रीब मिश्रण में ( मैंने शर्करा को कम रखने के लिए गुण को शामिल नहीं किया था). कैथा कुछ ज्यादा ही हो गया था वरना स्वाद सही दिशा में ही जाता दिखाई दे रहा था. कुल मिला कर यह स्वादिष्ट से अधिक झकझोरने वाला काढ़ा था जिह्वा के दृष्टिकोण से.

    • बाद में उस वुड ऐपल वाले फ़्रीज़ में रखे बचे हुए काढ़े में अमूल की लस्सी मिला देने पर पूरा मिश्रण काफ़ी पीने योग्य हो गया था.

    • हल्दी, काली मिर्च, गुड, नींबू, अदरक, हींग, तुलसी व सेंधा नमक… फ़िर अंत में उसमें चाय से भरी पत्तियों वाली छननी को थोड़े से डुबा दिया. चाय और गुड़ का असर कुछ ज़्यादा हो गया, वरना यह नुस्ख़ा भी बारंबार इस्तेमाल किए जाने वाली फ़ेहरिस्त में शामिल हो जाएगा. ख़ासकर जब शर्करा की मात्रा को अपने काढ़े में कम रखना हो तब. हींग और सेंधा नमक की बाज़ाए इसमें पतंजलि के जलजीरा मसाले को मिलाकर भी आगे एक और प्रयोग बनता है.

    • हल्दी, अदरक, काली मिर्च, पुदीना, तुलसी, हींग, गरम मसाला, सेंधा नमक, जामुन का सिरका… इसमें शायद हींग ज़्यादा हो गई, या फ़िर वो पूरी तरह से ग़ैरज़रूरी थी, जो स्वाद की कड़वाहट से अभाषित हो रहा था. इसके साथ ही शर्करा की अनुपस्थिति तथा बाद में शारीरिक श्रम व कम कार्बोहाइड्रेट्स वाले आहार ग्रहण के चलते कुछ ही घंटों बाद सुस्ती (लो शुगर या ब्लड प्रेशर?) का अनुभव हुआ, जो फ़िर से दर्शाता है कि ऐसे नुस्ख़ों का मनमानी उपयोग सलाहयोग्य कदापि नहीं माना जा सकता, स्वस्थ या अस्वस्थ, दोनों ही अवस्थाओं में.

      बाद में अमूल की लस्सी मिला कर इसे और पीने लायक व शर्करा/ रक्तचाप वाले दृष्टिकोण से सुरक्षित बनाने में सफलता अर्जित की. मैंने देखा है कि जब जामुन के सिरके वाले नुस्ख़े में गुड़ भी डाला गया हो तथा बाद में पतंजलि के आँटा बिस्कुट जैसा कुछ मीठा खा लिया जाए तो उस सुस्ती वाली अवस्था का सामना नहीं करना पड़ता है. इसका दूसरा पहलू यह भी है कि ऐसे नुस्ख़े रक्तचाप व शर्करा की समस्याओं से जूझ रहे लोगों की मदद करते हैं, ऐसे दावों की मेरे अवलोकनों से कुछ तो पुष्टि की जा सकती है.

    • अमरूद वाली कड़क चाय…

      हल्दी, काली मिर्च, दूध, चीनी, लौंग, तुलसी, अदरक तथा अमरूद के टुकड़े… उबाल कर एक छननी में चाय की पत्तियाँ रख कर उपर से मिला दिया… अमरूद, लौंग तथा तुलसी का सामूहिक स्वाद भले ही प्रियकर ना लगे, लेकिन मेरी नशेड़ियों जैसी कड़क चाय वाली चॉइस में एकदम ख़रा उतर रहा था वो.

    • काले अंगूरों का एक गुच्छा, दो छोटे संतरे, दो छोटे केले, तुलसी, अदरक, दो-तीन लौंग, हींग, सेंधा नमक व गरम मसाला… एक छोटी तपेली में भरकर पानी के साथ उबाल दिए… पिछले दो-तीन औसत प्रयोगों के पश्चात् ये वाला नुस्ख़ा अच्छा था… 👌

    • दो चुकंदर, तीन या चार टमाटर तथा कुछ और भी था जो मुझे अब याद नहीं आ रहा… ये तीनों तुलसी, हल्दी की जड़ों के टुकड़ों, हींग, लौंग, अदरक, काली मिर्च, सेंधा नमक व गरम मसाले के साथ बेहद रोचक साबित हुए थे थोड़े दिनों पहले, लेकिन अब मैं शब्दशः नुस्ख़ा भूल रहा हूँ.

    • एक चुकंदर, दो गाज़र, हल्दी (पॉउडर व जड़ों के टुकड़े), तुलसी, हींग, लौंग, गुड़, अदरक, सेंधा नमक व काली मिर्च… ये वाला नुस्ख़ा भी अच्छा था, जिसके बचे हुए हिस्से के साथ दूध मिलाकर मैंने अगले दिन चाय भी बना डाली थी.

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